शिव पूजा और व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें जरूरी नियम

महाशिवरात्रि जैसे पावन पर्व पर भगवान शिव की आराधना पूरे देश में श्रद्धा और विश्वास के साथ की जाती है। यह दिन आत्मसंयम, साधना और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन और सही विधि से की गई शिव पूजा जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा लाती है। लेकिन कई बार लोग अनजाने में ऐसी छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे पूजा का पूर्ण आध्यात्मिक फल नहीं मिल पाता।

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अगर आप भी इस पावन अवसर पर व्रत रख रहे हैं या शिवलिंग का अभिषेक करने जा रहे हैं, तो कुछ जरूरी नियमों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। आइए विस्तार से जानते हैं कि शिव पूजा और व्रत के दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

पूजा के दौरान इन चीजों का अर्पण न करें

शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पर केतकी का फूल अर्पित नहीं करना चाहिए। इसके पीछे पौराणिक कारण बताया गया है। इसी तरह तुलसी दल भी शिव जी को नहीं चढ़ाया जाता, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय मानी जाती है।

कई लोग अनजाने में शिवलिंग पर सिंदूर या कुमकुम चढ़ा देते हैं, जबकि यह भी वर्जित है। भगवान शिव को केवल चंदन का तिलक अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा अभिषेक के समय शंख से जल चढ़ाने से भी बचना चाहिए। शिव पूजा में सरलता और शुद्धता सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।

व्रत में खान-पान की गलतियां न करें

महाशिवरात्रि के व्रत में गेहूं, चावल, बेसन और मैदा जैसे सामान्य अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। प्याज और लहसुन जैसे तामसिक पदार्थों से दूरी बनाना जरूरी है, क्योंकि ये मन को अशांत कर सकते हैं।

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भोजन बनाते समय साधारण नमक की जगह केवल सेंधा नमक का उपयोग करना चाहिए। बहुत अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन करने से शरीर भारी हो जाता है और पूजा में एकाग्रता कम हो सकती है। व्रत के दिन मांसाहार, शराब और किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। संयम और सादगी ही इस व्रत की आत्मा है।

अभिषेक और परिक्रमा से जुड़े जरूरी नियम

शिवलिंग का जलाभिषेक करते समय तांबे का लोटा शुभ माना जाता है। लेकिन यदि दूध से अभिषेक कर रहे हैं तो तांबे के बर्तन का उपयोग नहीं करना चाहिए। दूध के लिए स्टील या चांदी का पात्र उचित माना जाता है।

एक और महत्वपूर्ण नियम यह है कि शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। हमेशा आधी परिक्रमा करें और जलाधारी, जहां से अभिषेक का जल बाहर निकलता है, उसे लांघना नहीं चाहिए। यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।

सच्ची श्रद्धा ही सबसे बड़ा नियम

भगवान शिव भोलेनाथ कहलाते हैं, यानी वे सरल भक्ति से ही प्रसन्न हो जाते हैं। पूजा में दिखावा या आडंबर की जरूरत नहीं होती। स्वच्छ मन, सात्विक आहार और सही नियमों का पालन करते हुए की गई आराधना ही सच्चे अर्थों में फलदायी होती है।

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इस महाशिवरात्रि पर यदि आप इन छोटी लेकिन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखेंगे, तो आपकी पूजा अधिक प्रभावी और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक होगी। श्रद्धा, संयम और नियमों के साथ की गई शिव भक्ति निश्चित रूप से जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है।

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