Mahashivratri Vrat Food: महाशिवरात्रि के दिन उपवास में क्या खाएं और क्या नहीं

Mahashivratri Vrat Food: 15 फरवरी 2026 को मनाई जा रही महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, साधना और भक्ति का विशेष अवसर है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए श्रद्धालु उपवास रखते हैं। व्रत का अर्थ सिर्फ भोजन त्यागना नहीं होता, बल्कि शरीर और मन को शुद्ध रखना भी होता है।

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सही खान-पान का चुनाव करना बेहद जरूरी है, ताकि दिनभर ऊर्जा बनी रहे और पूजा-पाठ में मन लगा रहे। अगर व्रत के दौरान संतुलित और सात्विक आहार लिया जाए तो शरीर हल्का रहता है और मन भी शांत बना रहता है। आइए जानते हैं कि महाशिवरात्रि के व्रत में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से दूरी बनानी चाहिए।

महाशिवरात्रि व्रत में क्या खाएं?

महाशिवरात्रि के उपवास में फलाहार को सबसे उत्तम माना गया है। सेब, केला, संतरा, अनार और पपीता जैसे फल शरीर को आवश्यक विटामिन और पानी प्रदान करते हैं, जिससे कमजोरी महसूस नहीं होती। नारियल पानी और नींबू पानी भी दिनभर तरोताजा रखने में सहायक होते हैं।

दूध और दूध से बने पदार्थ जैसे दही, पनीर, मखाने की खीर और लस्सी भी व्रत में लिए जा सकते हैं। ये शरीर को प्रोटीन और कैल्शियम देते हैं। अगर आप थोड़ा भारी फलाहार लेना चाहते हैं तो कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और समा के चावल से बनी खिचड़ी या पूरी खा सकते हैं। साबूदाना खिचड़ी या वड़ा भी लोकप्रिय विकल्प है।

सूखे मेवे जैसे बादाम, काजू और अखरोट सीमित मात्रा में लेने से ऊर्जा मिलती है। व्रत के दौरान साधारण नमक की जगह केवल सेंधा नमक का उपयोग करना चाहिए। हल्का और सात्विक भोजन लेने से शरीर और मन दोनों संतुलित रहते हैं।

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महाशिवरात्रि के दिन किन चीजों से बचें?

व्रत की पवित्रता बनाए रखने के लिए गेहूं, चावल और सामान्य अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। मैदा से बनी चीजें भी वर्जित मानी जाती हैं। प्याज और लहसुन जैसे तामसिक पदार्थों से दूरी रखना जरूरी है, क्योंकि ये मन को विचलित करते हैं।

मांसाहार, शराब और किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन इस दिन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। बहुत अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन भी व्रत के उद्देश्य के विपरीत होता है, क्योंकि इससे आलस्य और भारीपन महसूस होता है। ज्यादा चाय या कॉफी पीने से भी बचना चाहिए, क्योंकि यह शरीर को डिहाइड्रेट कर सकता है।

सात्विक आहार का महत्व

महाशिवरात्रि का व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का मार्ग है। जब हम सात्विक भोजन लेते हैं तो शरीर हल्का और मन शांत रहता है। इससे ध्यान और मंत्र जाप में एकाग्रता बढ़ती है। सही आहार का पालन करने से न केवल शारीरिक शुद्धि होती है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी मिलती है।

इस महाशिवरात्रि पर श्रद्धा, संयम और सात्विकता के साथ व्रत रखें और भगवान शिव की भक्ति में लीन होकर दिन को सार्थक बनाएं।

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